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विराट पर्व
अध्याय ६०
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अर्जुन उवाच
विहाय़ कीर्तिं विपुलं यशश्च; युद्धात्परावृत्य पलाय़से किम् |  १६   क
न तेऽद्य तूर्याणि समाहतानि; यथावदुद्यान्ति गतस्य युद्धे ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति