विराट पर्व  अध्याय ६०

अर्जुन उवाच

न ते पुरस्तादथ पृष्ठतो वा; पश्यामि दुर्योधन रक्षितारम् |  १९   क
परैहि युद्धेन कुरुप्रवीर; प्राणान्प्रिय़ान्पाण्डवतोऽद्य रक्ष ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति