विराट पर्व  अध्याय ६०

वैशम्पाय़न उवाच

स तेन वाणेन समर्पितेन; जाम्वूनदाभेन सुसंशितेन |  ३   क
रराज राजन्महनीय़कर्मा; यथैकपर्वा रुचिरैकशृङ्गः ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति