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द्रोण पर्व
अध्याय ६०
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सञ्जय़ उवाच
न हि यत्र महावाहुर्वासुदेवो व्यवस्थितः |  ३३   क
किञ्चिद्व्यापद्यते तत्र यत्राहमपि च ध्रुवम् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति