अनुशासन पर्व  अध्याय ९५

शुनःसख उवाच

न्यस्तमाद्यमपश्यद्भिर्यदुक्तं कृतकर्मभिः |  ७७   क
सत्यमेतन्न मिथ्यैतद्विसस्तैन्यं कृतं मय़ा ||  ७७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति