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शल्य पर्व
अध्याय ६०
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सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवधे यानि रोमाणि हृषितानि नः |  १६   क
अद्यापि न विहृष्यन्ति तानि तद्विद्धि भारत |  १६   ख
इत्यव्रुवन्भीमसेनं वातिकास्तत्र सङ्गताः ||  १६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति