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शल्य पर्व
अध्याय ६०
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सञ्जय़ उवाच
स्फिग्देशेनोपविष्टः स दोर्भ्यां विष्टभ्य मेदिनीम् |  २४   क
दृष्टिं भ्रूसङ्कटां कृत्वा वासुदेवे न्यपातय़त् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति