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आदि पर्व
अध्याय ६१
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वैशम्पाय़न उवाच
अजकस्त्वनुजो राजन्य आसीद्वृषपर्वणः |  १७   क
स मल्ल इति विख्यातः पृथिव्यामभवन्नृपः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति