आदि पर्व  अध्याय ६१

वैशम्पाय़न उवाच

जामदग्न्येन रामेण यः स सर्वविदां वरः |  ७०   क
अय़ुध्यत महातेजा भार्गवेण महात्मना ||  ७०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति