आदि पर्व  अध्याय ६१

वैशम्पाय़न उवाच

नातिह्रस्वा न महती नीलोत्पलसुगन्धिनी |  ९६   क
पद्माय़ताक्षी सुश्रोणी असिताय़तमूर्धजा ||  ९६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति