कर्ण पर्व  अध्याय ४१

सञ्जय़ उवाच

सर्वं व्याचष्ट दुर्धर्षो वासुदेवः किरीटिने |  ६   क
ततो राजन्प्रादुरासीन्महाघोरो महारणः ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति