अनुशासन पर्व  अध्याय ६१

भीष्म उवाच

यावद्भूमेराय़ुरिह तावद्भूमिद एधते |  ४   क
न भूमिदानादस्तीह परं किञ्चिद्युधिष्ठिर ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति