अनुशासन पर्व  अध्याय ६१

भीष्म उवाच

स कुलीनः स पुरुषः स वन्धुः स च पुण्यकृत् |  ४२   क
स दाता स च विक्रान्तो यो ददाति वसुन्धराम् ||  ४२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति