अनुशासन पर्व  अध्याय ६१

भीष्म उवाच

शतमप्सरसश्चैव दिव्यमाल्यविभूषिताः |  ८५   क
उपतिष्ठन्ति देवेन्द्र सदा भूमिप्रदं नरम् ||  ८५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति