menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
सभा पर्व
अध्याय ६१
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
कथं ह्यविजितां कृष्णां मन्यसे धृतराष्ट्रज |  ३१   क
यदा सभाय़ां सर्वस्वं न्यस्तवान्पाण्डवाग्रजः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति