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सभा पर्व
अध्याय ६१
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कश्यप उवाच
विद्धो धर्मो ह्यधर्मेण सभां यत्र प्रपद्यते |  ६९   क
न चास्य शल्यं कृन्तन्ति विद्धास्तत्र सभासदः ||  ६९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति