सभा पर्व  अध्याय ६१

अर्जुन उवाच

आहूतो हि परै राजा क्षात्रधर्ममनुस्मरन् |  ९   क
दीव्यते परकामेन तन्नः कीर्तिकरं महत् ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति