वन पर्व  अध्याय ६१

दमय़न्त्यु उवाच

यूथभ्रष्टामिवैकां मां हरिणीं पृथुलोचन |  २३   क
न मानय़सि मानार्ह रुदतीमरिकर्शन ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति