वन पर्व  अध्याय ६१

दमय़न्त्यु उवाच

यमन्वेषसि राजानं नलं पद्मनिभेक्षणम् |  २९   क
अय़ं स इति कस्याद्य श्रोष्यामि मधुरां गिरम् ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति