वन पर्व  अध्याय ६१

दमय़न्त्यु उवाच

प्रणमे त्वाभिगम्याहं राजपुत्रीं निवोध माम् |  ४०   क
राज्ञः स्नुषां राजभार्यां दमय़न्तीति विश्रुताम् ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति