वन पर्व  अध्याय ८१

पुलस्त्य उवाच

व्यासेन नृपशार्दूल द्विजार्थमिति नः श्रुतम् |  ७७   क
सर्वतीर्थेषु स स्नाति मिश्रके स्नाति यो नरः ||  ७७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति