वन पर्व  अध्याय ६१

दमय़न्त्यु उवाच

ध्यात्वा चिरं भीमसुता दमय़न्ती शुचिस्मिता |  ९५   क
भर्तृशोकपरा दीना विवर्णवदनाभवत् ||  ९५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति