वन पर्व  अध्याय ६१

दमय़न्त्यु उवाच

अहो वताय़मगमः श्रीमानस्मिन्वनान्तरे |  ९८   क
आपीडैर्वहुभिर्भाति श्रीमान्द्रमिडराडिव ||  ९८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति