वन पर्व  अध्याय ६१

दमय़न्त्यु उवाच

विशोकां कुरु मां क्षिप्रमशोक प्रिय़दर्शन |  ९९   क
वीतशोकभय़ावाधं कच्चित्त्वं दृष्टवान्नृपम् ||  ९९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति