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विराट पर्व
अध्याय ६१
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वैशम्पाय़न उवाच
तान्प्रस्थितान्प्रीतमनाः स पार्थो; धनञ्जय़ः प्रेक्ष्य कुरुप्रवीरान् |  २५   क
आभाषमाणोऽनुय़यौ मुहूर्तं; सम्पूजय़ंस्तत्र गुरून्महात्मा ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति