भीष्म पर्व  अध्याय ६१

भीष्म उवाच

महोरग वराहाद्य हरिकेश विभो जय़ |  ४७   क
हरिवास विशामीश विश्वावासामिताव्यय ||  ४७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति