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भीष्म पर्व
अध्याय ६१
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भीष्म उवाच
तत्रासुरवधं कृत्वा सर्वलोकसुखाय़ वै |  ६८   क
धर्मं स्थाप्य यशः प्राप्य योगं प्राप्स्यसि तत्त्वतः ||  ६८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति