द्रोण पर्व  अध्याय ६१

धृतराष्ट्र उवाच

ततोऽहमव्रुवं सूत मन्दं दुर्योधनं तदा |  २२   क
वासुदेवेन तीर्थेन पुत्र संशाम्य पाण्डवैः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति