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द्रोण पर्व
अध्याय ६१
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धृतराष्ट्र उवाच
शल्यस्य सोमदत्तस्य भीष्मस्य च महात्मनः |  ३३   क
द्रोणस्याथ विकर्णस्य वाह्लिकस्य कृपस्य च ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति