द्रोण पर्व  अध्याय ६१

धृतराष्ट्र उवाच

मय़ापि चोक्तास्ते वीरा वचनं धर्मसंहितम् |  ३६   क
नान्यथा प्रकरिष्यन्ति धर्मात्मानो हि पाण्डवाः ||  ३६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति