उद्योग पर्व  अध्याय १४५

भीष्म उवाच

अन्धः करणहीनेति न वै राजा पिता तव |  ३६   क
राजा तु पाण्डुरभवन्महात्मा लोकविश्रुतः ||  ३६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति