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विराट पर्व
अध्याय १३
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वैशम्पाय़न उवाच
अहो तवेय़ं परिचारिका शुभा; प्रत्यग्ररूपा प्रतिभाति मामिय़म् |  ८   क
अय़ुक्तरूपं हि करोति कर्म ते; प्रशास्तु मां यच्च ममास्ति किञ्चन ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति