आदि पर्व  अध्याय ३

सूत उवाच

कर्मणः पृथिवीपाल मम येन दुरात्मना |  १९२   क
विघ्नः कृतो महाराज गुर्वर्थं चरतोऽनघ ||  १९२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति