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शल्य पर्व
अध्याय ३०
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युधिष्ठिर उवाच
त्वं तु केवलमौर्ख्येण विमूढो नाववुध्यसे |  ६२   क
पृथिवीं दातुकामोऽपि जीवितेनाद्य मोक्ष्यसे ||  ६२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति