अनुशासन पर्व  अध्याय ६२

नारद उवाच

यो दद्यादपरिक्लिष्टमन्नमध्वनि वर्तते |  १४   क
श्रान्ताय़ादृष्टपूर्वाय़ स महद्धर्ममाप्नुय़ात् ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति