अनुशासन पर्व  अध्याय ६२

नारद उवाच

आवाहाश्च विवाहाश्च यज्ञाश्चान्नमृते तथा |  ३३   क
न वर्तन्ते नरश्रेष्ठ व्रह्म चात्र प्रलीय़ते ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति