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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६२
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वैशम्पाय़न उवाच
रक्षन्ते ये च तद्द्रव्यं किङ्करा रौद्रदर्शनाः |  १५   क
ते च वश्या भविष्यन्ति प्रसन्ने वृषभध्वजे ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति