आदि पर्व  अध्याय १३५

वैशम्पाय़न उवाच

न चैनानन्ववुध्यन्त नरा नगरवासिनः |  २१   क
अन्यत्र विदुरामात्यात्तस्मात्खनकसत्तमात् ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति