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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६२
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः प्रदक्षिणीकृत्य शिरोभिः प्रणिपत्य च |  २१   क
व्राह्मणानग्निसहितान्प्रय़युः पाण्डुनन्दनाः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति