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सभा पर्व
अध्याय ६२
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वैशम्पाय़न उवाच
तिष्ठत्वय़ं प्रश्न उदारसत्त्वे; भीमेऽर्जुने सहदेवे तथैव |  २४   क
पत्यौ च ते नकुले याज्ञसेनि; वदन्त्वेते वचनं त्वत्प्रसूतम् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति