उद्योग पर्व  अध्याय ६२

विदुर उवाच

तत्र पश्यामहे सर्वे मधु पीतममाक्षिकम् |  २३   क
मरुप्रपाते विषमे निविष्टं कुम्भसंमितम् ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति