उद्योग पर्व  अध्याय ६२

विदुर उवाच

ततः किरातास्तद्दृष्ट्वा प्रार्थय़न्तो महीपते |  २६   क
विनेशुर्विषमे तस्मिन्ससर्पे गिरिगह्वरे ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति