उद्योग पर्व  अध्याय ६२

विदुर उवाच

एकेन रथमास्थाय़ पृथिवी येन निर्जिता |  २९   क
प्रतीक्षमाणो यो वीरः क्षमते वीक्षितं तव ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति