menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ६२
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
तत्ते विलपितं सर्वं मय़ा राजन्निशामितम् |  १०   क
अर्थे निविशमानस्य विषमिश्रं यथा मधु ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति