menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
वृको द्विपस्थं गिरिराजवासिनं; भृशं शरैर्द्वादशभिः पराभिनत् |  ४८   क
ततो वृकं साश्वरथं महाजवं; त्वरंश्चतुर्भिश्चरणे व्यपोथय़त् ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति