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आदि पर्व
अध्याय २०३
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नारद उवाच
न तस्याः सूक्ष्ममप्यस्ति यद्गात्रे रूपसम्पदा |  १५   क
न युक्तं यत्र वा दृष्टिर्न सज्जति निरीक्षताम् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति