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शल्य पर्व
अध्याय ६२
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वैशम्पाय़न उवाच
यदि न त्वं भवेन्नाथः फल्गुनस्य महारणे |  १९   क
कथं शक्यो रणे जेतुं भवेदेष वलार्णवः ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति