menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
क्षीणशस्त्रस्तु कौन्तेय़ः कर्णेन समभिद्रुतः |  ६२   क
दृष्ट्वार्जुनहतान्नागान्पतितान्पर्वतोपमान् |  ६२   ख
रथमार्गविघातार्थं व्याय़ुधः प्रविवेश ह ||  ६२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति