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शल्य पर्व
अध्याय ६२
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वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजस्य वचनं श्रुत्वा यदुकुलोद्वहः |  २९   क
आमन्त्र्य दारुकं प्राह रथः सज्जो विधीय़ताम् ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति