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शल्य पर्व
अध्याय ६२
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वैशम्पाय़न उवाच
तं रथं यादवश्रेष्ठः समारुह्य परन्तपः |  ३१   क
जगाम हास्तिनपुरं त्वरितः केशवो विभुः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति